पुणे न्यूज डेस्क: पुणे जिले के नसरापुर में तीन साल की मासूम बच्ची के साथ हुई दरिंदगी और उसकी हत्या ने पूरे समाज को स्तब्ध कर दिया है। इस जघन्य अपराध के बाद जहां पूरे इलाके में आक्रोश व्याप्त है, वहीं एक अत्यंत महत्वपूर्ण और चौंकाने वाला पहलू यह सामने आया है कि 65 वर्षीय आरोपी के अपने ही परिवार ने उसे पूरी तरह से त्याग दिया है। आरोपी की पत्नी और बेटे ने न केवल उसे ठुकरा दिया है, बल्कि वे अदालत से उसके लिए मृत्युदंड (फांसी) की मांग कर रहे हैं।
परिवार का आक्रोश और आरोपी से दूरी
इस घटना ने आरोपी के परिवार को भीतर तक झकझोर कर रख दिया है। उनके बयानों से साफ जाहिर होता है कि वे इस शर्मनाक कृत्य से कितने दुखी और क्रोधित हैं:
आरोपी की पत्नी का बयान: उन्होंने कहा कि पिछले दस वर्षों से उनका आरोपी से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने अत्यंत कठोर शब्दों में मांग की कि आरोपी को उसी तरह पत्थरों से कुचलकर मार दिया जाना चाहिए, जैसे उसने उस मासूम के साथ किया। उन्होंने साफ कहा कि वे उसका चेहरा भी नहीं देखना चाहतीं।
बेटे की प्रतिक्रिया: आरोपी के बेटे ने कहा कि उसे ऐसे व्यक्ति का बेटा कहलाने में शर्म आती है। उसने कहा कि इस घटना ने उसे अंदर तक हिला दिया है, क्योंकि उसके परिवार में भी बच्चे हैं। उसने अदालत से मांग की है कि आरोपी को फांसी दी जाए या फिर उसे जनता के सामने कड़ा दंड दिया जाए।
पुलिस जांच और कानूनी कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुणे ग्रामीण पुलिस पूरी तरह सक्रिय है। इस घृणित अपराध के बाद न्याय सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं:
विशेष जांच दल (SIT): मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया गया है। इस टीम का नेतृत्व एक वरिष्ठ महिला अधिकारी कर रही हैं।
पुलिस हिरासत: आरोपी फिलहाल पुलिस की हिरासत में है। उस पर 1 मई को बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के गंभीर आरोप दर्ज किए गए हैं।
साक्ष्य जुटाना: पुलिस हर पहलू को बारीकी से खंगाल रही है ताकि जल्द से जल्द चार्जशीट दाखिल की जा सके और आरोपी को कानून के तहत सख्त से सख्त सजा दिलाई जा सके।
समाज में व्याप्त गुस्सा
यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को झकझोरने वाला वाकया बन गई है। नसरापुर सहित पूरे जिले में लोग सड़कों पर उतरकर आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। समाज के हर वर्ग ने इस कृत्य की कड़ी निंदा की है और इस बात को सराहा है कि आरोपी के परिवार ने भी अपराधी का साथ देने के बजाय कानून और न्याय का पक्ष चुना है।